ग़ज़ल की बहर तय करें
एक ही बहर में पूरी ग़ज़ल लिखें
क़ाफ़िया चुनें
रदीफ़ तय करें
मतला लिखें
हर शेर में दोनों मिसरों का वज़न समान रखें
हर दूसरे मिसरे में क़ाफ़िया और रदीफ़ का पालन करें
मक़्ता में अपना तख़ल्लुस शामिल करें
भाषा सरल, सटीक और प्रभावी रखें
हर शेर को स्वतंत्र अर्थ देने की कोशिश करें
भाव, लय और संगीतात्मकता बनाए रखें
उर्दू, हिंदी और फ़ारसी शब्दों का संतुलित प्रयोग करें
तुक और लय की शुद्धता जाँचें
ग़लत मात्रा या वज़न से बचें
बार-बार पढ़कर संशोधन करें
